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अस्थि विसर्जन के लिए पवित्र घाट और स्थान

भारत में अस्थि विसर्जन के लिए कई पवित्र घाट और स्थान हैं, जिनमें हरिद्वार (हर की पौड़ी), वाराणसी (मणिकर्णिका, अस्सी, दशाश्वमेध घाट), और गया (फल्गु नदी) प्रमुख हैं, जहाँ लोग अपने प्रियजनों की अस्थियों को विसर्जित कर आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा, दिल्ली में यमुना तट पर गुरुद्वारा मजनू का टीला (अस्थि घाट), गुजरात में द्वारका (गोमती घाट), और आगरा के पास रुनकता (रेणुका घाट) भी महत्वपूर्ण स्थान हैं।

प्रमुख अस्थि विसर्जन घाट:
हरिद्वार, उत्तराखंड: गंगा नदी के किनारे स्थित, हर की पौड़ी घाट सबसे प्रसिद्ध है। यहां अस्थि विसर्जन से आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है, ऐसा माना जाता है।

वाराणसी, उत्तर प्रदेश: मणिकर्णिका घाट, अस्सी घाट, राज घाट और दशाश्वमेध घाट जैसे कई घाटों पर यह अनुष्ठान किया जाता है। यह स्थान हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।

गया, बिहार: फल्गु नदी के तट पर स्थित यह स्थान पिंडदान और अस्थि विसर्जन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि माता सीता ने यहीं पिंडदान किया था।

दिल्ली: यमुना नदी के किनारे मजनू का टीला पर हाल ही में एक नया “अस्थि घाट” बनाया गया है, जो सिख समुदाय सहित सभी के लिए है।

द्वारका, गुजरात: गोमती नदी के अरब सागर से मिलने वाले संगम स्थल पर अस्थि विसर्जन किया जाता है।

रुनकता, आगरा (रेणुका घाट): यमुना तट पर स्थित यह घाट, भगवान परशुराम से जुड़ी कथा के कारण अस्थि विसर्जन के लिए महत्वपूर्ण है।

अन्य महत्वपूर्ण स्थान:

प्रयागराज (इलाहाबाद): गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम (त्रिवेणी संगम) पर भी अस्थि विसर्जन होता है।

रामेश्वरम: यह भी एक महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ अनुष्ठान किए जाते हैं।

इन स्थानों पर लोग पूरे विधि-विधान से अस्थि विसर्जन कर अपने दिवंगत परिजनों की आत्मा की शांति और सद्गति के लिए प्रार्थना करते हैं।(old reference and updated on December 2025 for information and knowledge for every Indians)

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