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-प्रकृति हमेशा बुरे या अच्छे कर्म का परिणाम देती ही है

आप हिंदू हों, मुसलमान हों, सिख हों, क्रिश्चियन हों या अन्य धर्म से। आप किसी ना किसी रूप में अपने धर्म को अवश्य मानते हैं। कुछ लोग नास्तिक होते हैं लेकिन वो भूल जाते हैं कि जब उनकी मृत्यु होगी तो उनका दाह-संस्कार उनके परिजन करेंगे और जिसकी मृत्यु हुई वह यह नहीं देख पाएगा कि उसके पार्थिव शरीर का क्यों उसकी अनिच्छा के बावजूद सम्बंधित धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा रहा है या किया गया…?।

हम प्रकृति के नियम की चर्चा कर रहे हैं। कुछ लोग अपने जीवनकाल में धन, वैभव और प्रभाव तथा अपने बुढ़ापे और अपनी भविष्य की पीढ़ी के लिए प्रकृति या धर्म के विपरीत जाकर धनार्जन करते हैं। गलत तरीके से मकान भी बनवा लेते हैं। बैंक में अच्छी खासी रकम भी जमा कर लेेते हैं। अनाप-शनाप तरीके से धन को व्यय करते हैं। इसके अलावा कुछ लोग अपराध करते हैं। कोई बलात्कार करता है, कोई डकैती या चोरी करता है अथवा अन्य तरह के अपराध। वे सिर्फ वर्तमान की चिंता करते हैं लेकिन आने वाले दिनों में उसका नकारात्मक परिणाम क्या होगा उसकी चिंता नहीं करते हैं, चिंता सिर्फ सुखद भविष्य या वर्तमान की करते हैं और अपराध और बुराईयों को करते जाते हैं।

बुरा कर्म करने वालों या अपराधियों के दर्जनों ऐसे उदाहरण हैं जिनमें प्रकृति ने उनके बुरे कार्यों का बदला लिया। बलात्कारी जब पकड़ा गया तो पुलिस ने कभी ना कभी पकड़ा और कई साल के लिए कारावास। वह तो कारावास भुगतता ही है लेकिन उसके बुरे कर्म का असर परिवार के सदस्यों पर भी पड़ना एक सत्य है। परिवार के ये सदस्य स्वयं को गुमनामी में छिपा लेते हैं। कई राज्यों में तो अब पुलिस ’’मृत्युदंड’’ अथवा ’अंगड़ा-लंगड़ा’’ करने का माध्यम बन चुकी है जो इस बात का परिचायक है कि प्रकृति पुलिस के माध्यम से अपना कार्य करवा रही है। इसी प्रकार रिश्वतखोर या धन चुराने वालों पर भी सरकारी फंदा समय-समय पर कसता रहता है। अगर सरकार की नजर में नहीं आए तो घर में बच्चों का बिगड़ जाना, कलेश, दुर्घटना में घायल हो जाना, बीमारी में हमेशा परिवार के किसी ना किसी सदस्य का रहना जैसी घटनाएं और दुर्घटनाएं होती रहती हैं। अर्थात जीवन अशांत ही रहता है। जिन्होंने अत्याचार और अनाचार किए सदियों बाद कोई ना कोई महापुरूष किसी ना किसी रूप में आता है और प्रकृति उसके माध्यम से अपना बदला लेती है।

अब मनुष्य को ही यह तय करना है कि उसे शांत और सुखद जीवन चाहिये या नहीं….?। क्या वह अपनी बुराईयों के माध्यम से परिवार को बदनामी की ओर तो नहीं ले जा रहा है…?। बुरा कर्म करने वाले लोग कुछ वृक्षों या फसल से तात्कालिक शिक्षा ले सकते हैं। अच्छी फसल या वृक्ष तभी पनपता है अच्छा बीज या खाद डाली गई हो और उसकी रक्षा की गई हो। तभी संबंधित व्यक्ति के मस्तिष्क पर शांति और सुखदता प्रवेश करती है। अर्थात सार यही है कि ’’जिसने तुम्हें इंसान के रूप में पृथ्वी पर भेजा है उससे पंगा मत लो,वरना परिणाम बुरा ही होगा’’।

——Writer—-

SHEKHAR KAPOOR

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