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न्यूज पोर्टल की स्थापना भारतीय संस्कृति के मूल्यों का बनाये रखने के क्रम में की गई है। आधुनिकता की दौड़ में हमने जन्म को तो महत्व दिया है लेकिन मृत्यु को नहीं। इंसान जन्म लेने के उपरांत अनेक वर्षों, अर्द्ध शताब्दी और कई तो शताब्दि तक जीवित रहते हैं। इस जीवन यात्रा में वह परिवार, समाज और देश के निर्माण के साथ ही संस्कृति के भी वाहक होते हैं लेकिन मृत्यु उपरांत अंतिम क्रिया के बाद ईश्वर की शरण में पहुंच चुके व्यक्ति या हस्ती के कार्य कुछ वर्षों के बाद परिवार के लोग ही भूलने लगते हैं। अधिकांश परिवार तो ऐसे हैं जिन्हें मात्र तीन पीढ़ियों अर्थात स्वयं, पिताश्री और दादा-दादी या समतुल्य नाना-नानी के ही बारे में जानकारी होती है लेकिन इसके पहले के पूर्वजों के बारे में नहीं। इसी प्रकार जब मृत व्यक्ति या हस्ती की जन्म तारीख या अवसान तारीख के बारे में भी लोगों को स्मरण नहीं होता है। इसी प्रकार अधिकांश शमशान घाटों के हालात बदतर हैं। वहां सुविधाओं का अभाव है। मृत्यु उपरांत धार्मिक कार्य भी आधुनिकता की भेंट चढ़ चुके हैं। हमारा उद्देश्य यही है कि हर व्यक्ति को अपने दिवंगत पूर्वजों की जानकारी और उनके यशस़्वी कार्य स्मरण रहना चाहियें जिससे कि हर परिवार का हर सदस्य सुशिक्षित, सुलक्षण, सौम्य, सदाचारी, सत्यवादी और संस्कृति का वाहक बन सके जिससे कि वह भी अपनी आयु पूरी होने पर पूज्यनीय और प्रशंसनीय श्रेणी का पात्र बन सकें।
सभी पूर्वजों को समर्पित इस न्यूूज पोर्टल के संस्थापक शेखर कपूर देश के प्रतिष्ठितम मीडिया समूह में 40 साल कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में भी मीडिया से जुड़े हुए हैं। उनका उद्देश्य यही है कि हम अपने पूर्वजों की शिक्षा और विचारों के माध्यम से ही प्रगति कर सकते हैं। यह शाश्वत सत्य है कि पूर्वजों या दिवंगतों की आत्मा अदृश्य रूप से अपने परिवार से जुड़ी रहतीं हैं। विपदा की स्थिति में स्मरण मात्र से वो सम्बंधितजन को संभाल लेती हैं।
जीवन का सत्य यही है कि सच्चाई, सादगी, सदचरित्रता, जिम्मेदारी, उत्साह सहित सकारात्मक कार्यों से शिक्षा लेकर हम अपने परिवार, समाज और देश के प्रति आसक्त रहते हुए मदद कर सकते हैं। जिन हस्तियांे ने देश और समाज के लिए अपना जीवन विभिन्न रूपों में दिया वह आज भी स्मरणीय हैं। यही भावना के साथ इस पोर्टल की स्थापना की गई है। उम्मीद है आप स्वागत करेंगे।