रिश्तों की जिम्मेदारी का प्रेरणादायी उदाहरण

कैंसर से बेटे की मौत तो ससुर ने निभाया पिता का फर्ज
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के जैथल गांव के रहने वाले दिनेश वैरागी ने रिश्तों की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर कोई तारीफ कर रहा है. दरअसल, तीन साल पहले कैंसर के कारण उन्होंने अपने बेटे कपिल को खो दिया था. बेटे की मौत के बाद परिवार गहरे दुख में था, लेकिन दिनेश ने अपनी बहू प्रियंका का भविष्य अंधेरे में नहीं जाने दिया. उन्होंने बहू को बेटी का दर्जा दिया और उसके नए जीवन की शुरुआत कराने का फैसला किया.
प्रियंका की शादी साल 2018 में दिनेश वैरागी के बेटे कपिल से हुई थी. शादी के कुछ समय बाद ही कपिल को कैंसर हो गया. करीब एक साल तक इलाज चला, लेकिन साल 2023 में उनका निधन हो गया. पति की मौत के बाद प्रियंका के सामने भविष्य की बड़ी चिंता खड़ी हो गई.
प्रियंका के पिता रामबाबू बताते हैं कि उस कठिन समय में दिनेश वैरागी ने उनकी बेटी का पूरा साथ दिया. उन्होंने साफ कहा कि वे बहू को बेटी की तरह विदा करेंगे और उसकी जिंदगी को रुकने नहीं देंगे. इसके बाद उन्होंने करीब दो साल तक प्रियंका के लिए एक अच्छे जीवनसाथी की तलाश की.
आखिरकार, विदिशा जिले के अटारीखेड़ा निवासी गोविंद के साथ रिश्ता तय हुआ. दिनेश वैरागी खुद लड़के के परिवार से मिलने गए और सभी बातों को समझने के बाद शादी पक्की की. गोविंद खंडवा में नौकरी करते हैं और उन्होंने भी इस रिश्ते को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया.
दो दिन पहले भोपाल के एक रिसॉर्ट में करीब 350 मेहमानों की मौजूदगी में प्रियंका और गोविंद की शादी पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुई. इस शादी का पूरा खर्च दिनेश वैरागी ने उठाया. सबसे भावुक पल तब आया, जब उन्होंने अपनी बहू का कन्यादान एक पिता की तरह किया और बेटी की तरह विदा किया.
प्रियंका के पिता रामबाबू कहते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कोई समधी अपनी बहू को इतनी इज्जत और सम्मान के साथ बेटी मानकर विदा करेगा. दिनेश वैरागी की यह पहल बताती है कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि प्यार, विश्वास और अपनापन से भी बनते हैं.
(updated on 10th July2026)



