मृत्यु को सुखद बनाना परिवार की जिम्मेदारी

वृद्धावस्था के वक्त जब इंसान का शरीर ढीला हो जाता है। जब शरीर जब काम नहीं करने लगता है और वह बिस्तर पर पड़ा रहता है तो परिवार, रिश्तेदार और परिचित सम्बंधित व्यक्ति का कुशल-क्षेम जानने के लिए लगातार सम्बंधित परिवार में पहुंचने लगते हैं। परिवार के लोग मरीज के साथ बात करते हैं, उनकी हर कामना को पूरा करने के लिए एक यत्न करते हैं। परिवार के लोगों के चेहरे पर मायूसी तो रहती है लेकिन वह सम्बंधित वृद्ध व्यक्ति को सब ठीक हो जाएगा…..आप जल्दी ही ठीक हो जाएंगे जैसे विभिन्न वाक्य बोलते रहते हैं। दूसरी ओर वृद्ध व्यक्ति पलंग पर लेटे-लेटे अपनी मौत की प्रतीक्षा करता रहता है। प्रतीक्षा का क्षण कितने मिनटों, कितने घंटों और कितने दिनों का होता है यह किसी को पता नहीं होता है लेकिन मौके पर मौजूद सभी लोग यह मान लेते हैं कि उनके परिवार का यह वृद्ध सदस्य अब मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहा है।
ध्यान रहे कि जिसकी मृत्यु दिखाई पड़ रही हो उन्हें सुखद और सुकून भरी मृत्यु देने की जिम्मेदारी परिवार और रिश्तेदारों तथा मित्रों की है। जिसको जाना है वह हंसते और मुस्कुराते हुए सभी से विदा ले। उनकी विदाई के बाद परिवार को यह संतुष्टि हो कि उनके प्रियजन की सुकून भरी मृत्यु हुई है। क्योंकि मृत्यु के समय के क्षण लम्बे वक्त तक परिवार के सदस्यों के मस्तिष्क में बसे रहते हैं जो परिवार को विचलित कर सकते हैं।
धार्मिक दृष्टि से कई परिजन ऐसे मौके पर रामायण और गीता का पाठ करने लगते हैं। कई लोग रेडियो और टीवी पर भजन लगा देते हैं जिससे कि वातावरण सम्बंधित वृद्ध के अनुकूल हो सके। धार्मिक दृष्टि से माना गया है कि ऐसे मौके पर सम्बंधित व्यक्ति बिस्तर पर लेटे-लेटे मृत्यु की प्रतीक्षा तो कर रहा होता है लेकिन उसका मस्तिष्क कई विचारों में काम कर रहा होता है। ऐसे मौके पर वह परिवार के सदस्यों को विभिन्न तरह से इशारे कर सम्बंधित काम बताता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से माना गया है कि जो व्यक्ति मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहा होता है उसके मस्तिष्क में उस वक्त संगीत की लहरियां बहुत ही रामबाण का काम करती हैं। वह संगीत को सुनते वक्त सुकून महसूस करता है। संगीत उनके तनाव, बैचेनी और दर्द को कम करता है, याददाश्त को सक्रिय कर पुरानी यादों को ताजा करता है, और उन्हें मानसिक शांति प्रदान करता है। यह एक गैर-औषधीय तरीके के रूप में काम करता है, जो उन्हें सम्मानजनक और सुकून भरी विदाई देने में मदद करता है। पसंदीदा गाने, विशेष रूप से बचपन या जवानी के दिन, बुजुर्गों में पुरानी यादों को जगाते हैं, जिससे उन्हें सांत्वना मिलती है। जीवन के अंतिम क्षणों में प्रिय संगीत का माहौल, जैसे शांतिपूर्ण वाद्ययंत्र या धार्मिक संगीत, उन्हें एकाकीपन महसूस नहीं होने देता। इंटरनेट पर उपलब्ध एक जानकारी के अनुसार कनाडा की अग्रणी और प्रशामक संगीत चिकित्सक डेबोरा सैल्मन कहती हैं, ’’संगीत की व्यापकता और गहराई ही इसे जीवन के अंतिम क्षणों में एक अद्भुत साधन बनाती है, क्योंकि यह विश्राम, दर्द नियंत्रण, कल्याण की भावना और भावनात्मक एवं आध्यात्मिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देता है। संगीत में हमारे दिलों और आत्माओं से सीधे संवाद करने की क्षमता होती है’’।



