विश्वास व कर्तव्य जरूरी है रिश्तेदारी में

पृथ्वी पर सिर्फ इंसान ही एक ऐसा प्राणी है जिसे लम्बे वक्त तक रिश्ते निभाने का वरदान ईश्वर ने दिया हुआ है। अवसान अर्थात मौत के बाद भी जो लोग रिश्तों का महत्व समझते हैं वो सभ्यता के साथ रहते हुए आगे बढ़ते हैं और प्रगति करते हैं। अनंतकाल तक उनकी कीर्ति और यश बना रहता है। हमारे देश के इतिहास या परिवार के पूर्वजों को जिन्होंने समझा है उनकी भावी पीढ़ी भी लगातार विकास करती रहती है।
पृथ्वी पर इंसान के अलावा पशु और पक्षी भी विचरण करते हैं लेकिन सिर्फ इंसान ही एक ऐसा प्राणी है जो लम्बे वक्त तक जीवित रहता है। इस जीवनकाल में वह एक शिशु के बाद बालक या बालिका, पुरूष या स्त्री, माता-पिता, भाई-बहन सहित विभिन्न पारावारिक और सामाजिक रिश्ते बनाता और निभाने की जिम्मेदारी निभाने के लिए होता है। रिश्तों के कारण ही तो माता-पिता अपने बच्चों को पालते, पौसते, शिक्षित और सभ्य बनाते हैं और अपने जीवन के अनमोल क्षणों को बच्चों के लिए समर्पित कर देते हैं। इसी जीवनकाल में कोई दादा, दादी, नाना, नानी, मामा, मामी सहित विभिन्न रिश्ते बनते हैं जिन्हें निभाना जरूरी है और निभाना चाहिये। एक रिश्तेदार जो प्रगति कर गया है उसे अपने समाज,परिवार और खानदान मंे कम से कम एक बार अवश्व उन लोगों की मदद करनी चाहिये जो प्रगति नहीं कर पाये हैं या जिन्हें ज्ञान नहीं मिला है। लेकिन यह भी जरूरी है कि जिसे मदद मिली है वह मदद करने वाले से बारम्वार मदद की अपेक्षा नहीं करे बल्कि जो मदद मिली है उसके सहारे अपना रास्ता खुद तय करे और हमेशा याद रखे कि वह मदद के सहारे ही आगे बढ़ा है और जिसने मदद की है उसके प्रति हमेशा कृतज्ञ रहे। ध्यान रहे कि इंसान को इंसान के साथ हर जीव और पशु की मदद के लिए ही ईश्वर ने भेजा है।.
इंसान के अलावा पशु और पक्षियों एवं जीव के रिश्ते क्षणिक अर्थात कुल पल,घंटों या दिनों के लिए होते हैं। एक मछली जन्म लेते ही अपनों से बिछड़ जाती है। एक बछड़ा जन्म लेने के बाद कुछ महीने बाद ही अपनी माॅ से बिछड़ जाता है। श्वाॅन अर्थात डाॅग्स पिल्ले के रूप में जन्म लेते हैं लेकिन कुछ महीनों बाद ही अपने जन्म दाता से बिछड़ जाते हैं। उनका कोई परिवार लम्बे वक्त तक नहीं होता है। यही स्थिति बकरा, बकरी, मुर्गा या मुर्गी अन्य जीवों के साथ होती चली आई है।
उपरोक्त लेख का भावार्थ यही है कि इंसान को रिश्ते निभाने के लिए पृथ्वी पर ईश्वर ने अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है। अर्थात पृथ्वी को चलाने के लिए ही इंसान का जन्म हुआ है और यह रिश्तों के माध्यम से ही संभव है। जो व्यक्ति एकांत में रहते हैं, रिश्ते निभाने में विश्वास नहीं करते हैं, अपनी मनमानी करते हैं, छल और कपट करते हैं, दूसरों का हक मारते हैं या असभ्यता से पेश आते हैं उनके रिश्ते मित्र के रूप में, परिवार या समाज के रूप में क्षणिक ही होते हैं और कुछ समय बाद ऐसे व्यक्तियों का नाम लेने वाला या याद करने वाला भी नहीं होता है।
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