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राष्ट्रीय युद्ध स्मारक

दिल्ली में मुख्य रूप से दो युद्ध स्मारक हैं: इंडिया गेट (India Gate), जो प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्धों में शहीद हुए 82,000 भारतीय सैनिकों की याद दिलाता है, और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial), जो 1962 के भारत-चीन युद्ध, भारत-पाक युद्धों, कारगिल युद्ध और अन्य अभियानों में शहीद हुए सैनिकों को समर्पित है, जहाँ ‘अमर जवान ज्योति’ की लौ अब प्रज्वलित होती है, जो भारत के शूरवीरों के अदम्य साहस और बलिदान की कहानी कहती है।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा 25 फरवरी 2019 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था। स्मारक परिसर राजपथ और सेंट्रल विस्टा की भव्यता और समरूपता के अनुरूप निर्मित है। भूनिर्माण और वास्तुकला की सादगी पर विशेष ध्यान देते हुए, यहाँ के वातावरण की गंभीरता को बनाए रखा गया है। मुख्य स्मारक के अतिरिक्त, यहाँ 21 ऐसे सैनिकों की प्रतिमाओं के लिए समर्पित क्षेत्र है जिन्हें युद्ध में देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार ‘परम वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया है। मुख्य स्मारक की रचना यह दर्शाती है कि कर्तव्य की राह में एक सैनिक द्वारा किया गया सर्वोच्च बलिदान न केवल उसे अमर बनाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि एक सैनिक की आत्मा अमर रहती है।

स्मारक को इंडिया गेट के पास मौजूदा छतरी (चंदवा) के आसपास बनाया गया है। स्मारक की दीवार को जमीन के साथ और मौजूदा सौंदर्यशास्त्र के साथ सामंजस्य स्थापित किया है।[2] 1947-48, 1961 (गोवा), 1962 (चीन), 1965, 1971, 1987 (सियाचिन), 1987-88 (श्रीलंका), 1999 (कारगिल), और युद्ध रक्षक जैसे अन्य युद्धों में शहीदों के नाम इस प्रकार आजादी के बाद शहीद हुए १३,३००[3] भारतीय सैनिकों के नाम यहां पत्थरों पर लिखे गए हैं।[4]

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक 25 फरवरी 2019 को बनाया गया था। इसकी नींव भारत सरकार के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखा गया। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक हमारे उन सभी वीर को हमारे उन सभी वीरों को श्रद्धांजलि देता है जो युद्ध में अपना बलिदान दे चुके (Green wich) हैं। राष्ट्रीय युद्धस्मारक दिल्ली में स्थित इंडिया गेट पर बनाया गया है। आज इस राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, को बने हुए 3 साल हो चुके है साथ ही 22 जनवरी 2022 को यह भी ऐलान हुआ की अमर जवान ज्योति अब से राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में ही जलाई जाएगी और यह पूरा कार्यक्रमवायु वायु सेना के ऑफिसर बलभद्र राधाकृष्णन की अध्यक्षता में किया गया।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के आर्किटेक्चर श्री योगेश चंद्र हसन जी हैं।


विशेष – राष्ट्रीय युद्ध स्मारक भारत के वीरगति प्राप्त सैनिको की स्मृति में बनाया गया है।


यह एक विश्वस्तरीय नैशनल वॉर मैमोरियल (NWM)है। , अब तक दुनिया के प्रमुख देशों में भारत ही शायद ऐसा अकेला देश था, जिसके पास वॉर मेमोरियल नहीं था। खैर, बीते 60 साल का इंतजार खत्म हुआ। क्योंकि इस वॉर मैमोरियल की मांग उठ रही थी, जो अब पूरी हो सकी है।

इस वॉर मेमोरियल को तैयार होने में 176 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इस वॉर मैमोरियल में उन सभी शहीदों के नाम अंकित हैं, जिन्होंने अपने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। (old reference and updated on December 2025 for information and knowledge for every Indians)

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