-भाग्य, दुर्भाग्य, सफलता और परिणाम

-शेखर कपूर
-नई दिल्ली
जीवन में हर व्यक्क्ति को एक बार परमात्मा अपना भाग्योदय करने का मौका देता है। इस मौेके को जो पकड़ लेता है अर्थात दांतों में भींच लेता है वह सफल हो जाता है लेकिन मुश्किल बात यह है कि यह समय कब आएगा, कौनसा क्षण होता है और उसे कैसे पकड़ा जाए यह बात सिर्फ ह्दय और मस्तिष्क ही कुछ क्षण के लिए अहसास कराते हैं और इंसान उस विचार को यह सोचते हुए कई बार नहीं करता है कि कहीं गलत तो वह नहीं कर रहा है ? उसके बाद यह समय निकल जाता है। जिनकों भाग्योदय का लाभ मिल जाता है इसके बाद इंसान उस भाग्य को मेहनत, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा में बदल कर शानदार उन्नति और प्रसिद्धि प्राप्त करता है और स्वयं के जीवनकाल में सुख का भोग करता है तो अगली पीढ़ी के लिए भी काफी अवसर छोड़ जाता है।
जो लोग भाग्योदय का अहसास नहीं कर पाते हैं और जो अवसर उनसे निकल चुका होता है उसके बाद मात्र वो पछतावा ही करते हैं। उसके बाद का जीवन उन्हें दूसरा अवसर मेहनत और मेहनत में नियत, नियत में ईमानदारी के रूप में मिलता है जिसके सहारे वो प्रगति कर सकते हैं। कई लोग तात्कालिक आधार पर भाग्योदय करने की कोशिश करते हैं जैसे सट्टेबाजी, बेईमानी से धन कमाना, सुखीपन के साधन जुटा लेना, अपराध से धन कमाना, किसी को बेवकूफ बनाकर धन कमाना, दहेज या अन्य अनैतिक कार्य करते हैं जिनसे उन्हें यह अहसास होता है कि इस तरह से भी भाग्दोदय किया जा सकता है और वो उस पर इतराते हैं, दूसरों को अपने से सीख लेने की नसीहत देते हैं और कई बार कई लोगों को सम्मोहित कर कर उन्हें भी गलत रास्तों पर ले जाते हैं। लेकिन ये लोग जो तात्कालिक भाग्दोदय करते हैं परमात्मा कुछ मिनटों के बाद, कुछ दिनों के बाद और कुछ सालों के बाद उन्हें सुख संपदा से दूर कर देता है और उन्हे निर्धन, गरीब, असहाय, मरीज, दुर्घटना, बीमारी या सरकारी कार्रवाई का शिकार बना देता है। यही लोग अंत मे अपना जीवन दूसरों को कोसते हुए, दीनता दिखाते हुए गुजार देते हैं और एक दिन अनजान, अज्ञात, बुरी अथवा अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं।
कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो बुराई या अपराध से कमाए धन और यश के बावजूद यह अहसास करते हैं कि उन्होंने जो धन और सुख के साधन गलत तरीके से अर्जित किए हैं वह गलत है और उसका परिणाम उन्हें भुगतना ही पड़ेगा तो वह उसकी टांग तोड़ने के लिए सामाजिक स्तर पर मदद, लोगों की सेवा, गरीबों की मदद, गरीब परिवारों की लड़कियों का पालन पोषण, उनकी शादी सहित विभिन्न सामाजिक कार्यांे में धन का एक हिस्सा खर्च करते रहते हैं। इतना ही नहीं एक बार गलत तरीके से धन और सुख प्राप्ति के बाद फिर से वे वही गलत कार्य नहीं करते हैं तो परमात्मा कुछ हद तक उनकी मदद करता रहता है। उनका बुरा वक्त जब आता है तो उन लोगों की दुआएं और आर्शीवाद उसके काम आती हैं जिसकी उसने मदद उसने अतीत अर्थात भूतकाल में की होती है।
इस लेख में लिखे गए शब्दों को कोई भी अच्छे और बुरे विचारों वाला व्यक्ति मात्र एक पौधे और वृक्ष के बढ़ने के माध्यम से सीख सकता है। अर्थात अच्छा बीज जमीन में बोने के बाद उसकी बेहतर देखभाल जो करता है वह पौधा बढ़ा होकर समय के साथ हमेशा अपनी सुगंध, हरियाली या फल ही प्रदान करता रहता है। बुरे विचार के व्यक्ति इसी पौधे को कुम्हलाते हुए देख सकते हैं जो बिना कुछ दिये कुछ समय बाद मर जाता है।
(UPDATED ON 2ND JUNE 2025)



