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ताप्ती नदी में अस्थि विसर्जन

इस नदी में अस्थि विसर्जन करने से जल में घुल जाती हैं अस्थियां! यहां कई राज्यों से आते हैं लोग

बुरहानपुर. अस्थि विसर्जन को लेकर प्रयागराज, ओंकारेश्वर, काशी विश्वनाथ, गया सहित अन्य स्थानों का अपना-अपना अपना महत्व है. लेकिन, आज हम आपको मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की ताप्ती नदी में अस्थि विसर्जन का महत्व बताते हैं. तापी महापुराण कथा में इसके विशेष महत्व का वर्णन किया गया है. मान्यता है कि जो भी अस्थियां ताप्ती नदी में विसर्जित की जाती हैं, वह पूरी तरह से पानी में घुल जाती हैं. बड़ी संख्या में लोग ताप्ती नदी के घाटों पर अस्थि विसर्जन करने के लिए पहुंचते हैं.


सूर्य पुत्री मां ताप्ती नदी में अस्थियां विसर्जन करने के लिए मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से भी लोग बुरहानपुर के नागझिरी घाट पर पहुंचते हैं. पं. नर्मदानंद गिरि महाराज ने बताया कि ताप्ती नदी में अस्थियां विसर्जन करने का एक विशेष महत्व है. ताप्ती के नागझिरी घाट पर भगवान श्री राम ने अपने पिता दशरथ का श्राद्ध किया था. तापी महापुराण में भी इसका वर्णन किया है कि ताप्ती नदी में अस्थियां विसर्जन करने से अस्थियां पानी में घुल जाती हैं.

ताप्ती नदी के तीन घाटों पर अस्थियां विसर्जित की जाती हैं, जिसमें नागझिरी घाट, राजघाट और सतियारा घाट पर विसर्जन करने के लिए लोग पहुंचते हैं. यहां पर ब्राह्मणों द्वारा लोगों से अस्थियां विसर्जन कराया जाता है.(old reference and updated on December 2025 for information and knowledge for every Indians)

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