पाकिस्तान के 135 दिवंगत हिंदुओं को गंगा की धारा में मुक्ति मिली

पाकिस्तान के 135 दिवंगत हिंदुओं को आखरिकार उनकी इच्छानुसार भारत में गंगा की धारा में मुक्ति मिल गई। सालों से वीजा का इंतजार कर रही उनकी अस्थियों को हरिद्वार में हर की पैड़ी पर विसर्जन के लिए लाया गया।
पाकिस्तान से 12 लोगों का दल इन अस्थियों को लेकर भारत आया था। पाकिस्तान में कराची के पंचमुखी मंदिर के महंत रामनाथ मिश्र इस दल के अध्यक्ष थे।
उनका कहना था कि, “ये बहुत पुण्य का काम हो रहा है। दोनों देशों के मित्रवत प्रयास से ही ये संभव हो पाया है वरना हम तो आस छोड़ ही चुके थे। अंततः आत्माओं को मुक्ति मिल ही गई।
पाकिस्तान में रहनेवाले हिंदू आमतौर पर अपनी आस्था के अनुसार सिंधु नदी में अस्थि विसर्जन कर देते हैं. लेकिन ये अस्थियां ऐसे लोगों की हैं जिन्होंने हरिद्वार में ही अस्थि विसर्जन की इच्छा प्रकट की थी या जिनके परिजन हरिद्वार में ही उनका अस्थि विसर्जन संस्कार करना चाहते थे।
विजय शर्मा ने बताया कि इनमें सबसे पुराना अस्थि कलश 40 साल पहले दिवंगत हुए महेश नैथानी का था और बाकी भी 35 साल से अधिक पुराने थे। कुछ ऐसे अस्थि कलश भी थे जिनके नाम मिट गए और जिनके परिवारों में कोई है भी नहीं है अब। अब तक ये अस्थियां कराची के शमशान घाट में सुरक्षित रखी हुई थीं। इनकी देख भाल मुराद बख्श नाम का एक युवक करता था।
हरिद्वार में इन अस्थियों के विसर्जन का आयोजन एक गैर सरकारी संस्था देवोत्थान समिति ने किया।
इसके महासचिव विजय शर्मा ने बताया कि, “2008 में हमें पता चला था कि कराची में ऐसे हिंदुओं की अस्थियां पड़ी हुई हैं और वीजा न मिलने के कारण वो हरिद्वार नहीं आ पा रही हैं। उसके बाद से हमने लगातार प्रधानमंत्री, विदेशमंत्री और पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क किया और उनको पत्र लिखकर इसके लिए प्रयास किया और आखिर हमारी सुन ली गई.”। (News of 24 जनवरी 2011)(old reference and updated on December 2025 for information and knowledge for every Indians)
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