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रानी लक्ष्मीबाई की समाधि

ग्वालियर: महारानी लक्ष्मीबाई, भारत की स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना की शहादत का स्थल आज भी ग्वालियर में स्थित है, जहाँ उनका समाधि स्थल बना हुआ है.यह वही स्थान है जहाँ महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ अंतिम युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की थी.

ग्वालियर के इस ऐतिहासिक स्थल पर महारानी लक्ष्मीबाई ने अपनी अंतिम सांस ली थी.अंग्रेजों से लंबे समय तक संघर्ष करने के बाद, एक कठिन स्थिति में उन्होंने अपने घोड़े के साथ ऊंचाई से नीचे की ओर छलांग लगाई.युद्ध में वीरता से लड़ते-लड़ते वे यहाँ शहीद हो गईं.उनके बलिदान को अमर बनाने के लिए इस स्थल पर एक स्मारक स्थापित किया गया है, जिसे महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के नाम से जाना जाता है.कहा जाता है कि इस स्थल पर कई संतों ने भी अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे, जिन्होंने महारानी को बचाने का प्रयास किया था.

महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 1834 में वाराणसी के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.बचपन में उनका नाम मनु था, और उनकी माता का नाम भागीरथी बाई तथा पिता का नाम मोरोपंत तांबे था.उनकी शादी झांसी के राजा गंगाधर राव नेवालकर से हुई थी.पति की मृत्यु के बाद महारानी ने झांसी की बागडोर अपने हाथों में ली और कुशलता से राज्य का शासन चलाया.(old reference and updated on December 2025 for information and knowledge for every Indians)

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